ग्रह-गोचर

गुरु की शुभ दृष्टि: इन राशियों के लिए भाग्य और ज्ञान के द्वार

📅 23 जून 2026 · ✍️ भाग्यसाथी डेस्क

वैदिक ज्योतिष में बृहस्पति यानी गुरु को सबसे शुभ ग्रह माना जाता है। इन्हें देवताओं का गुरु कहा गया है और ये ज्ञान, धर्म, संतान, भाग्य और धन के कारक हैं। गुरु की दृष्टि को अत्यंत कल्याणकारी माना जाता है — जिस भाव या ग्रह पर गुरु की दृष्टि पड़ती है, वहाँ शुभता का संचार होने की मान्यता है।

गुरु अपनी राशि से पाँचवें, सातवें और नवें भाव पर पूर्ण दृष्टि डालते हैं। इसे ज्योतिष में गुरु की त्रिदृष्टि कहा जाता है। पाँचवीं दृष्टि बुद्धि और संतान सुख से, सातवीं दृष्टि साझेदारी और संबंधों से, तथा नवीं दृष्टि भाग्य और धर्म से जोड़कर देखी जाती है।

जिन जातकों की कुंडली में गुरु बलवान होकर शुभ भावों को देखते हैं, उनके जीवन में शिक्षा, मार्गदर्शन और सद्बुद्धि का विशेष स्थान माना जाता है। ऐसे लोग प्रायः धर्म-कर्म में रुचि रखने वाले और दूसरों का भला सोचने वाले होते हैं।

गुरु को प्रसन्न रखने के लिए परंपरा में गुरुवार का व्रत, पीली वस्तुओं का दान, और बड़ों व गुरुजनों के सम्मान को शुभ बताया गया है। ये उपाय व्यक्तिगत आस्था का विषय हैं।

यह लेख पारंपरिक ज्योतिषीय मान्यताओं पर आधारित है, केवल जानकारी के उद्देश्य से। किसी भी निर्णय से पूर्व अपनी कुंडली का विश्लेषण किसी अनुभवी ज्योतिषी से अवश्य कराएँ।

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