जय जय श्री शनिदेव (शनि आरती)
शनि देव
जय जय श्री शनिदेव, भक्तन हितकारी।
सूर्य पुत्र प्रभु छाया, महतारी॥
जय जय श्री शनिदेव॥
श्याम अंग वक्र-दृष्टि, चतुर्भुजा धारी।
नीलाम्बर धार नाथ, गज की असवारी॥
जय जय श्री शनिदेव॥
क्रीट मुकुट शीश राजित, द्विकर है कुण्डल।
नीलमणि की माला, गल शोभित मंगल॥
जय जय श्री शनिदेव॥
धनुष-बाण धरि शूल, गदा है हाथ में।
जो जन तुमको ध्यावत, रहत सदा साथ में॥
जय जय श्री शनिदेव॥
वक्र-दृष्टि से तुम्हरी, भले-भले डरते।
नवग्रह में सब देवा, तुमसे ही नत रहते॥
जय जय श्री शनिदेव॥
तुम ही न्याय-दण्डधारी, कर्मों के दाता।
जैसा कर्म करे जन, वैसा फल पाता॥
जय जय श्री शनिदेव॥
जो यह आरती शनि की, श्रद्धा से गावे।
कष्ट-क्लेश सब मिटते, सुख-सम्पति पावे॥
जय जय श्री शनिदेव, भक्तन हितकारी।
सूर्य पुत्र प्रभु छाया, महतारी॥
ℹ️ यह पारंपरिक, सर्वत्र गायी जाने वाली आरती है, भक्ति-पठन हेतु प्रस्तुत।