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जय सन्तोषी माता

संतोषी माता

जय सन्तोषी माता, मैया जय सन्तोषी माता। अपने सेवक जन को, सुख सम्पत्ति दाता॥ जय सन्तोषी माता॥ सुन्दर चीर सुनहरी, माँ धारण कीन्हो। हीरा पन्ना दमके, तन शृंगार लीन्हो॥ जय सन्तोषी माता॥ गेरू लाल छटा छवि, बदन कमल सोहे। मंद हँसत करुणामयि, त्रिभुवन मन मोहे॥ जय सन्तोषी माता॥ स्वर्ण-सिंहासन बैठीं, सिर पर छत्र फिरे। चँवर ढुरे बहु सुन्दर, भक्त निहाल करे॥ जय सन्तोषी माता॥ गुड़ और चना परम प्रिय, ता में सन्तोष कियो। सन्तोषी कहलाई, भक्तन वैभव दियो॥ जय सन्तोषी माता॥ शुक्रवार प्रिय मानत, आज दिवस सोही। भक्त मंडली छाई, कथा सुनत मोही॥ जय सन्तोषी माता॥ जो जन प्रेम लगाकर, गावत आरती को। रिद्धि-सिद्धि सुख-सम्पति, भोगत भक्ति प्रियो॥ जय सन्तोषी माता॥
ℹ️ यह पारंपरिक, सर्वत्र गायी जाने वाली आरती है, भक्ति-पठन हेतु प्रस्तुत।
⚠️ केवल आस्था व जानकारी हेतु — वैज्ञानिक या पेशेवर सलाह नहीं। विवरण