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सोमवार व्रत कथा

भगवान शिव व साहूकार के पुत्र की कहानी

📅 हर सोमवार (विशेषकर श्रावण मास के सोमवार) 🙏 भक्त शिवजी की कृपा, अच्छे जीवनसाथी व मनोकामना हेतु सोमवार व्रत रखते हैं।

एक नगर में एक धनी साहूकार रहता था। उसके पास धन-दौलत की कोई कमी न थी, पर संतान न होने का दुख था। वह भगवान शिव का परम भक्त था और हर सोमवार श्रद्धा से शिवजी का व्रत व पूजन करता था।

उसकी भक्ति से प्रसन्न होकर माता पार्वती ने शिवजी से कहा — 'यह आपका सच्चा भक्त है, इसकी मनोकामना पूरी कीजिए।' शिवजी ने वरदान तो दिया, पर साथ ही बता दिया कि साहूकार को जो पुत्र होगा, वह केवल बारह वर्ष की आयु तक ही जीवित रहेगा। साहूकार को पुत्र-प्राप्ति हुई, पर यह जानकर वह चिंतित भी रहा। फिर भी उसने अपनी शिव-भक्ति नहीं छोड़ी।

जब पुत्र बड़ा हुआ, तो साहूकार ने उसे विद्या-अध्ययन के लिए मामा के साथ काशी भेज दिया। रास्ते में जगह-जगह वे यज्ञ और दान करते गए। एक नगर में एक राजकुमारी का विवाह हो रहा था, पर जिस लड़के से विवाह होना था वह एक आँख से काना था। उसके पिता ने छल से साहूकार के सुंदर पुत्र को दूल्हा बनाकर विवाह करा दिया।

ईमानदार पुत्र ने राजकुमारी को सच बता दिया — 'मैं तुम्हारा असली वर नहीं हूँ, छल हुआ है।' राजकुमारी ने उसकी सच्चाई का आदर किया। पुत्र आगे काशी पढ़ने चला गया।

पर विधि के विधान से, बारहवें वर्ष में पढ़ाई के दौरान पुत्र के प्राण निकल गए। मामा विलाप करने लगा। तभी संयोग से वहाँ से शिव-पार्वती गुजर रहे थे। पार्वती ने करुणावश शिवजी से प्रार्थना की — 'इस बालक को जीवित कर दीजिए, इसके माता-पिता की भक्ति अपार है।' शिवजी ने उनकी शिव-भक्ति के प्रभाव से बालक को फिर से जीवनदान दे दिया।

बालक जीवित होकर अपनी पढ़ाई पूरी कर लौटा। रास्ते में वही राजकुमारी उसे पहचान गई और उसके माता-पिता ने उसका विधिवत विवाह करा दिया। पुत्र सकुशल घर लौटा। साहूकार और उसकी पत्नी ने जब अपने जीवित पुत्र को सुहागिन बहू के साथ देखा, तो उनकी खुशी का ठिकाना न रहा। यह सब शिवजी की कृपा और सोमवार व्रत का फल था।

तभी से भक्त सोमवार का व्रत रखते हैं, शिवलिंग पर जल-बेलपत्र चढ़ाते हैं और 'ॐ नमः शिवाय' का जाप कर मनोकामना पूर्ति की प्रार्थना करते हैं।

🌼 Seekh (Moral)

सच्ची भक्ति और ईमानदारी पर भगवान शिव की कृपा सदा बनी रहती है। विश्वास कभी नहीं छोड़ना चाहिए, चाहे संकट कितना भी हो।

ℹ️ These stories are based on folk tradition and are shared for faith and cultural reading.
⚠️ For faith & interest only — not scientific or professional advice. Details