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नाग पंचमी कथा

सर्पों के पूजन व किसान की कन्या की कहानी

📅 श्रावण मास, शुक्ल पक्ष पंचमी 🙏 नाग देवता का पूजन कर परिवार की रक्षा व कल्याण की कामना की जाती है।

श्रावण शुक्ल पंचमी को नाग पंचमी का पर्व मनाया जाता है, जिसमें नाग देवता की पूजा होती है। इससे जुड़ी एक प्रसिद्ध लोक-कथा है।

एक किसान अपने परिवार के साथ खेती करता था। एक बार खेत जोतते समय उसके हल से अनजाने में एक नागिन के बच्चे कुचलकर मर गए। जब नागिन लौटी और अपने बच्चों को मरा देखा, तो वह क्रोध और शोक से भर गई। उसने सोचा कि इस किसान के परिवार ने मेरे बच्चे मारे हैं, मैं भी बदला लूँगी।

रात को नागिन ने क्रोध में आकर किसान, उसकी पत्नी और बच्चों को डस लिया। पूरा परिवार मृत्यु को प्राप्त हो गया। अब केवल किसान की एक बेटी बची थी, जो उस समय घर पर नहीं थी। बदला पूरा करने नागिन उस बेटी के पास भी पहुँची।

पर वह दिन नाग पंचमी का था। किसान की बेटी सच्ची भक्त थी। उसने नागिन को आते देखा तो डरने के बजाय श्रद्धा से उसके सामने दूध का कटोरा रखा, हाथ जोड़कर नाग देवता की पूजा की और विनम्रता से कहा — 'हे नाग देवता, यदि अनजाने में मेरे परिवार से कोई भूल हुई हो तो क्षमा करें।'

कन्या की इस श्रद्धा, निर्मलता और विनम्रता से नागिन का क्रोध शांत हो गया। उसे दया आ गई। वह प्रसन्न होकर बोली — 'बेटी, तेरी भक्ति से मैं प्रसन्न हूँ। माँग, क्या चाहिए?' कन्या ने कहा — 'मेरे परिवार को जीवित कर दो।' नागिन ने अपनी कृपा से उसके पूरे परिवार को फिर से जीवित कर दिया।

तभी से नाग पंचमी के दिन नाग देवता की पूजा की जाती है, उन्हें दूध अर्पित किया जाता है, और प्रार्थना की जाती है कि वे प्रसन्न रहें और परिवार की रक्षा करें। इस दिन खेत जोतना और ज़मीन खोदना वर्जित माना जाता है, ताकि किसी जीव को हानि न पहुँचे।

🌼 Seekh (Moral)

हर जीव का सम्मान करना चाहिए। श्रद्धा, विनम्रता और क्षमा-भाव बड़े से बड़े क्रोध को भी शांत कर देते हैं।

ℹ️ These stories are based on folk tradition and are shared for faith and cultural reading.
⚠️ For faith & interest only — not scientific or professional advice. Details