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गणेश चतुर्थी कथा

भगवान गणेश के जन्म व प्रथम-पूज्य बनने की कहानी

📅 भाद्रपद मास, शुक्ल पक्ष चतुर्थी 🙏 विघ्नहर्ता गणेश की स्थापना व पूजन कर बुद्धि, शुभता व विघ्न-नाश की कामना की जाती है।

एक बार माता पार्वती स्नान के लिए जाने लगीं। उन्होंने सोचा कि कोई द्वार पर पहरा देने वाला हो। तब उन्होंने अपने शरीर के उबटन से एक सुंदर बालक की आकृति बनाई और उसमें प्राण डाल दिए। उस बालक को उन्होंने आदेश दिया — 'द्वार पर खड़े रहो, मेरी आज्ञा के बिना किसी को भीतर मत आने देना।'

थोड़ी देर बाद भगवान शिव वहाँ आए और भीतर जाने लगे। बालक ने उन्हें रोक दिया — 'माता की आज्ञा नहीं है, आप भीतर नहीं जा सकते।' शिवजी ने बहुत समझाया, पर बालक अपनी माँ की आज्ञा पर अडिग रहा। इस पर शिवजी के गणों और बालक में युद्ध हुआ, पर कोई बालक को हरा न सका। अंत में क्रोधित होकर शिवजी ने अपने त्रिशूल से बालक का सिर धड़ से अलग कर दिया।

जब माता पार्वती बाहर आईं और यह दृश्य देखा, तो वे शोक और क्रोध से व्याकुल हो उठीं। उन्होंने कहा — 'यह मेरा पुत्र था, इसे जीवित करो, नहीं तो मैं प्रलय कर दूँगी।' पार्वती का रौद्र रूप देखकर सब घबरा गए।

शिवजी ने अपने गणों से कहा — 'उत्तर दिशा में जाओ, जो भी पहला प्राणी सिर उत्तर की ओर करके सोता मिले, उसका सिर ले आओ।' गण एक हाथी का सिर ले आए। शिवजी ने वह हाथी का सिर बालक के धड़ पर लगाकर उसे फिर से जीवित कर दिया। इस तरह बालक 'गजानन' (हाथी के मुख वाले) बने।

फिर शिवजी ने उन्हें गणों का स्वामी 'गणेश' और 'गणपति' बनाया, और आशीर्वाद दिया कि किसी भी शुभ कार्य, पूजा या अनुष्ठान में सबसे पहले गणेश की ही पूजा होगी। जो गणेश का स्मरण किए बिना कोई काम करेगा, उसमें विघ्न आएँगे।

एक अन्य कथा में, गणेश ने अपने माता-पिता (शिव-पार्वती) की परिक्रमा कर 'सारा संसार माता-पिता में ही है' का ज्ञान देकर बुद्धि की परीक्षा जीती और प्रथम-पूज्य कहलाए। तभी से भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी को गणेश चतुर्थी मनाई जाती है — गणेश की स्थापना, पूजन, मोदक का भोग और विसर्जन के साथ।

🌼 Seekh (Moral)

माता-पिता की आज्ञा व सेवा सबसे बड़ा धर्म है। बुद्धि बल से बड़ी होती है, और हर शुभ कार्य का आरंभ विघ्नहर्ता के स्मरण से करना चाहिए।

ℹ️ These stories are based on folk tradition and are shared for faith and cultural reading.
⚠️ For faith & interest only — not scientific or professional advice. Details