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सकट चौथ (तिल चौथ) व्रत कथा

गणेश जी और बुढ़िया के संकट हरने की कहानी

📅 माघ मास, कृष्ण पक्ष चतुर्थी 🙏 माताएँ संतान की मंगल-कामना व संकट दूर करने के लिए गणेश जी का यह व्रत रखती हैं।

एक नगर में एक गरीब बुढ़िया रहती थी। वह बड़ी श्रद्धा से हर सकट चौथ को भगवान गणेश का व्रत रखती और तिल-गुड़ का भोग लगाती थी। उसके मन में गणेश जी के प्रति अटूट विश्वास था।

एक बार सकट चौथ के दिन उसने व्रत रखा और गणेश जी से प्रार्थना की — 'हे विघ्नहर्ता, मेरे सब संकट दूर करना।' उसी नगर में कुछ लोगों पर मुसीबत आई थी और झूठा आरोप लगने से कुछ निर्दोष लोग राजा के बंदीगृह में डाल दिए गए थे। उनमें बुढ़िया के अपने भी थे, जिनकी वह चिंता कर रही थी।

बुढ़िया ने सच्चे मन से गणेश जी का व्रत किया, तिल-गुड़ का भोग लगाया और रातभर संकट चौथ के चंद्रमा को अर्घ्य देकर प्रार्थना की कि उसके अपनों के संकट दूर हों। गणेश जी उसकी सच्ची भक्ति से प्रसन्न हुए।

थोड़े ही समय में सच्चाई सामने आ गई, निर्दोष लोग छूट गए और बुढ़िया का परिवार फिर से सुख-शांति से रहने लगा। जिन पर संकट आया था, वे सब सकट चौथ की महिमा मानने लगे।

तभी से माघ कृष्ण चतुर्थी को सकट चौथ (तिल चौथ / संकटा चौथ) का व्रत रखा जाता है। माताएँ इस दिन गणेश जी की पूजा कर, तिल-गुड़ का भोग लगाकर, और रात को चंद्रमा को अर्घ्य देकर अपनी संतान के मंगल और संकट-नाश की कामना करती हैं।

🌼 Seekh (Moral)

सच्चे मन से किया गया गणेश-स्मरण हर विघ्न और संकट को दूर कर देता है। श्रद्धा सबसे बड़ा बल है।

ℹ️ These stories are based on folk tradition and are shared for faith and cultural reading.
⚠️ For faith & interest only — not scientific or professional advice. Details