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दशहरा (विजयादशमी) कथा

श्रीराम द्वारा रावण वध की कहानी

📅 आश्विन मास, शुक्ल पक्ष दशमी (नवरात्रि के बाद) 🙏 बुराई पर अच्छाई की विजय का पर्व; रावण-दहन कर असत्य पर सत्य की जीत मनाई जाती है।

दशहरा, जिसे विजयादशमी भी कहते हैं, बुराई पर अच्छाई की विजय का महान पर्व है। इसकी सबसे प्रसिद्ध कथा भगवान श्रीराम और लंकापति रावण की है।

लंका का राजा रावण अत्यंत बलशाली, विद्वान और शिव-भक्त था, पर अहंकार उसका सबसे बड़ा दोष था। अपने बल और ज्ञान के घमंड में उसने माता सीता का हरण कर लिया और उन्हें बलपूर्वक लंका में बंदी बना लिया।

भगवान श्रीराम ने अपने भाई लक्ष्मण, भक्त हनुमान और वानर सेना के साथ लंका पर चढ़ाई की। समुद्र पर सेतु बना, घोर युद्ध हुआ। रावण के अनेक महायोद्धा — कुंभकर्ण, मेघनाद — मारे गए। अंत में आश्विन शुक्ल दशमी के दिन भगवान श्रीराम ने रावण का वध कर अधर्म का अंत किया और धर्म की स्थापना की। इसी कारण इस दिन को 'विजयादशमी' (विजय की दशमी) कहा जाता है।

एक अन्य कथा के अनुसार, इसी दिन माँ दुर्गा ने नौ दिन के युद्ध के बाद महिषासुर का वध किया था, इसलिए नवरात्रि के बाद दसवें दिन यह पर्व शक्ति की विजय के रूप में भी मनाया जाता है।

दशहरा यह संदेश देता है कि रावण कितना भी विद्वान और बलशाली क्यों न हो, अहंकार और अधर्म का अंत निश्चित है। रावण के दस सिर दस बुराइयों (काम, क्रोध, लोभ, मोह, अहंकार आदि) के प्रतीक माने जाते हैं।

तभी से हर वर्ष विजयादशमी पर रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के पुतलों का दहन किया जाता है — यह दिखाने के लिए कि बुराई चाहे कितनी ऊँची खड़ी हो, सत्य और धर्म के आगे जलकर राख हो जाती है। यह दिन नए कार्य आरंभ करने के लिए भी अत्यंत शुभ माना जाता है।

🌼 Seekh (Moral)

अहंकार और बुराई का अंत निश्चित है। बल और ज्ञान का उपयोग धर्म के लिए होना चाहिए, अधर्म के लिए नहीं।

ℹ️ These stories are based on folk tradition and are shared for faith and cultural reading.
⚠️ For faith & interest only — not scientific or professional advice. Details