अहिल्या उद्धार
श्रीराम के चरण-स्पर्श से शाप-मुक्त होने वाली अहिल्या की कथा
अहिल्या महर्षि गौतम की पत्नी थीं, जो अत्यंत सुंदर और पतिव्रता थीं। देवराज इंद्र उनके रूप पर मोहित हो गए और एक दिन छल से महर्षि गौतम का रूप धारण कर आश्रम आए, जब गौतम स्नान के लिए बाहर गए थे।
जब महर्षि गौतम लौटे और उन्हें छल का पता चला, तो वे अत्यंत क्रोधित हुए। उन्होंने इंद्र को भी शाप दिया और अहिल्या को भी शाप दे दिया कि वह पत्थर की शिला बनकर वर्षों तक इसी आश्रम में पड़ी रहेगी, किसी को दिखाई न देगी, केवल हवा पीकर तप करती रहेगी।
अहिल्या ने विनम्रता से क्षमा माँगी और बताया कि वह छल का शिकार हुई थी। तब गौतम ऋषि का क्रोध कुछ शांत हुआ और उन्होंने शाप में राहत दी — 'जब त्रेता युग में भगवान विष्णु राम के रूप में अवतार लेंगे और इस आश्रम में आकर अपने चरणों से तुम्हें स्पर्श करेंगे, तब तुम्हारा उद्धार होगा और तुम पुनः अपने रूप में आ जाओगी।'
अहिल्या वर्षों तक शिला रूप में, सच्चे पश्चाताप और तप के साथ, भगवान राम की प्रतीक्षा करती रहीं। उनका मन पूरी तरह निर्मल हो चुका था।
जब त्रेता युग में भगवान राम, विश्वामित्र मुनि के साथ उस आश्रम के पास से गुजरे, तो विश्वामित्र ने उन्हें अहिल्या की कथा सुनाई। भगवान राम ने जैसे ही अपने चरण उस शिला से स्पर्श कराए, अहिल्या शाप-मुक्त होकर अपने सुंदर रूप में प्रकट हो गईं।
अहिल्या ने भगवान राम की स्तुति की और उनके चरणों में नतमस्तक हुईं। राम के आशीर्वाद से वे पुनः अपने पति गौतम ऋषि के पास लौट गईं। अहिल्या उद्धार की यह कथा सिखाती है कि सच्चा पश्चाताप और प्रभु की कृपा बड़े से बड़े शाप को भी धो देती है।
सच्चा पश्चाताप और भगवान की कृपा बड़े से बड़े पाप व शाप को धो देती है।